Gazal by Mohan Rawal | निर्दोस नयनलाई दुखाई रहेछु...!!

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निर्दोस नयनलाई दुखाई रहेछु...!!
अनी धड्रकनलाई दुखाई रहेछु...!!

सप्ना आउँछौ रात बिरात सदैव...!
र त तनमनलाई दुखाई रहेछु...!!

एक्लै छटपटिएको हुन्छु रातमा...!
मुटुको कम्पनलाई दुखाई रहेछु...!!

उन्को अवतार देख्दैन चाँदनी...!
बिचरा गगनलाई दुखाई रहेछु...!!

पग्लिन्छु पोखिन्छ निर्थुक्क भिच्छु...!
भिजेर योवनलाई दुखाई रहेछु...!!



रचनाकार - मोहन रावल अनमोल 'अस्तु' 
बान्नातोली पाचँ अछाम
हाल - क्षितीज पारी बाट

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