Gazal by Mohan Rawal | सबैको मालीक ईश्वर भए पछी

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सबैको मालीक ईश्वर भए पछी...!!
भगवान पनि त चोर भए पछी...!!

कसरि मुलुक सुद्रिन्थौ र यहाँ...!
राजनैतिक खेल फोहोर भए पछी...!!

सिमाना मिचिन्छ निर्दोस कुटिन्छ...!
कुकुरको हात्मा बाङ्रडोर भए पछी...!!

कहिले काँहि गजल कोर्दछु म नी...!
जिन्दगी जिउनु बोर भए पछी...!!

डाको छोडेर रून्छु म एकान्तमा...!
मुटुमा दर्द भाव बिभोर भए पछि...!!

तिम्रो याद सहजै भुल्नेछु अवस्य...!
यो मुटु ढुङ्रगा झै कठोर भए पछि...!!

गजलकार - मोहन रावल अनमोल 'अस्तु'
बान्नातोलि पाचँ अछाम
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